दोनो पैरों से लाचार जी रहा है मुफलिसी की जिंदगी

सुधा बनी पिता का सहारा,सब्जी बेचकर कर भर रही परिजनों का पेट
रिपोर्ट:- मनोज मौर्य 
गोण्डा।कहते हैं जिससे दुनिया रूठ जाये उसे भगवान सहारा देते हैं,पर जिससे स्वयं भगवान रूठ जायें वह अभागा इस दुनिया में कहाँ जाये।अक्सर ऐसे हालातों में लोग मौत को गले लगाकर अपनी तमाम समस्याओं से परे चले जाते हैं। ऐसा ही एक बदनसीब  
जिले के झंझरी ब्लाक मे पचरिया मौजा के डिहवा गांव का रहने वाला दिव्यांग कालिका प्रसाद यादव है ।जो अपने एक पैर के कटने और दूसरे पैर के निःशक्त होने के कारण समाज की मुख्य धारा से कटकर गरीबी और मुफलिसी में लाचारी की जिन्दगी जीने को मजबूर हैं ।जहाँ प्रधानमंत्री व मुख्य मंत्री सबको आवास व शौचालय की बात करते हैं ,वह सब कालिका के पास आकर बेईमानी साबित हो रहा है। जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों की उपेक्षा का शिकार कालिका के परिवार को मकान व शौचालय भी नहीं  नसीब हैं। वहीं कालिका की लाडली पिता की मजबूरी मे उनकी उम्मीद की एक नन्ही सी किरण बनकर अपना सारा बचपन पिता व परिवार पर न्यौछावर कर दिया।मात्र चौदह वर्षीय सुधा गत चार वर्षों से नगर के एक छोर पोर्टरगंज से दूसरे छोर नवीन सब्जी मंडी तक करीब चौदह किलोमीटर आने जाने का सफर अपने लाचार गरीब दिव्यांग पिता की जर्जर ट्राई साइकिल पर सब्जियों के लदे बोझ को ढोने के लिये करती है।भोर के चार बजे से ट्राई साइकिल को चलाती हैं और भाड़ा बचाने के लिये पोर्टरगंज के निकट जेल रोड पर सड़क के किनारे पटरी पर सब्जी लगाकर बिक्री कर अपने परिवार के जीविको पार्जन मे पिता की सहयोगी बनी हुई है। कालिका का कहना हैं कि मजदूरी के दौरान कुदाल लग जाने से उसका बायां पैर कट गया और दाँया पैर भी निःशक्त हैं इसके कारण उसकी व परिवार की स्थिति पूरी चरमरा गयी । इतना ही नहीं उसका बेटा भी बेरोजगार हैं । 

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