गोण्डा।कई दिनों से कृषि कानूनों और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 की वापसी की मांग हेतु आंदोलन कर रहे किसानों को उ0प्र0 के बिजली इंजीनियरों ने अपना समर्थन देते हुये इसे निरस्त करने की मांग की है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के अध्यक्ष वी० पी० सिंह व महासचिव प्रभात सिंह ने बताया कि, इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 का ड्राफ्ट जारी होते ही उ0प्र0 सहित देश के बिजली इंजीनियरों ने इसका पुरजोर विरोध किया था। इस बिल में इस बात का प्रावधान है कि किसानों को बिजली टैरिफ में मिल रही सब्सिडी समाप्त कर दी जाए और बिजली की लागत से कम मूल्य पर किसानों सहित किसी भी उपभोक्ता को बिजली न दी जाए।
यद्यपि कि बिल में इस बात का प्रावधान किया गया है कि सरकार चाहे तो डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए किसानों को सब्सिडी दे सकती है किंतु इसके पहले किसानों को बिजली बिल का पूरा भुगतान करना पड़ेगा जो सभी किसानों के लिए संभव नहीं होगा। उन्होंने बताया कि किसान संयुक्त मोर्चा के आवाहन पर चल रहे आंदोलन में कृषि कानूनों की वापसी के साथ किसानों की यह एक प्रमुख मांग है कि,इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 वापस लिया जाए।किसानों का मानना है की इस बिल के जरिए बिजली का निजीकरण करने की योजना है जिससे बिजली निजी घरानों के पास चली जाएगी और निजी क्षेत्र मुनाफे के लिए काम करते हैं अतः बिजली की दरें किसानों की पहुंच से दूर हो जाएंगी।
जनपद अभियंता संघ के पदाधिकारी एएक्सएन रनवीर सिह ने किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा है कि किसानों की आशंका निराधार नहीं है, इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 और बिजली वितरण के निजीकरण के लिए जारी स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्युमेंट बिजली के निजीकरण के उद्देश्य से लाए गए हैं,ऐसे में सब्सिडी समाप्त हो जाने पर बिजली की दरें 10 से 12 रु प्रति यूनिट हो जाएगी और किसानों, गरीबों व अन्य उपभोक्ताओं को 8 से 10 हजार रु प्रति माह का न्यूनतम भुगतान करना पड़ेगा ।


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