गोण्डा डेस्क
गोण्डा। जिले में सभी सरकारी भाँग के ठेकों पर खुलेआम बेचे जा रहे अवैध गाँजे की कश में मदहोश होकर बर्बाद हो रही युवा पीढ़ी आबकारी व पुलिस की ईमान पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। कहने को तो जिले के हर क्षेत्र में स्थित सरकारी भाँग के ठेकों पर भाँग की बिक्री की जाती है,लेकिन इससे उलट हकीकत कुछ और ही है। भाँग का ठेका सिर्फ नाम होता है,पर वहाँ गाँजे के रूप में खुलेआम नशे का कारोबार किया जाता है। ऐसा नहीं है कि,आबकारी या पुलिस यह सब नहीं जानती?उन्हें सब मालूम है,लेकिन उनके चुप रहने के बड़े मायने हैं। सूत्र बताते हैं कि,आबकारी हो या फिर पुलिस, जगह और कमाई के हिसाब से सबका एक निश्चित महीना फिक्स रहता है। जिसके कारण यह धंधा बेरोक-टोक के खुलकर किया जा रहा है। जब कभी यह मीडिया के कैमरे यह कैद होते हैं तो पहले मैनेज कराने की बात की जाती है,नहीं मानने व सच उजागर करने पर मजबूरी में पुलिस को जब उनपर कार्रवाई करनी पड़ती है,तो फिर ये सभी उस मीडिया कर्मी के दुश्मन बन जाते हैं और येन-केन प्रकाणेन उस पर दबाव तो बनाया ही जाता है ,लेकिन कभी-कभार उन्हें धमकाया भी जाता है। जो जिले की आबकारी व पुलिस की अवैध नशे के कारोबार खत्म करने के चलाये जा रहे विभिन्न अभियानो की विश्वसनीयता पर बड़े ही गंभीर सवाल करती है।बताया जाता है कि,जिले में लगभग बीस के करीब सरकारी भाँग के ठेके हैं,लेकिन इसके इतर इससे अधिक ठेकेदारों ने सब ठेके बनाये हुये हैं।जो हर छोटे-बड़े बाजारों कस्बों व चौराहों पर पान की गुमटियों तक में संचालित किये जा रहे हे हैं।इस तरह देखा जाये तो पूरे जनपद में युवा इसके कश के धुंये में अपनी जिंदगी धुंआ-धुंआ कर रहे हैं।लेकिन ठेकेदार हों या जिले का आबकारी या फिर पुलिस प्रशासन सभी उस धुंये से अपनी रोटियाँ सेंकते नजर आ रहे हैं।जिले के युवा बर्बाद हों तो हों,उन्हें भला इससे कहाँ फर्क पड़ता है।
सूचना मिलने पर करते हैं कार्रवाई, अब तक दो को पकड़ा - आबकारी अधिकारी
इस संबंध में जब जिला आबकारी अधिकारी पी लवानिया से बात की गई तो उन्होंने बताया कि,सूचना मिलने पर वे त्वरित कार्रवाई करते हैं।उनसे जब यह पूछा गया कि, अबतक कितना को पकड़ा तो उन्होंने बताया कि,अब तक दो गाँजा बेचने वालों पकड़ा गया है। इसी के साथ उन्होंने बताया कि,लगातार आबकारी टीम अभियान चला रही है।


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