गोण्डा:आवास के बदले रूपयों की मांग पर धरने पर बैठने की चेतावनी


अपात्रों को आवास पात्र हुये निराश

रिपोर्ट:-मनोज मौर्य/प्रदीप शुक्ला 
गोण्डा।जिले के मुजेहना विकासखण्ड  के ग्राम पंचायत बेसहुपुर में  ग्राम प्रधान व सिकरेटरी की मिली भगत से सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार आम है। चाहे वो मनरेगा में लाखों का घोटाला हो या पशु टीन शेड वितरण या फिर  इंटरलाकिंग व शौचालय के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि के साथ पंचायत भवन का कायाकल्प, गाँव में स्ट्रीट लाइट, लगवाने जैसे विभिन्न विकास परक कार्य हों।सभी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाते हैं।
बहरहाल इन विकास योजनाओं में गड़बड़ियां मिलने की शिकायतों का अम्बार इस विकास खण्ड में पहले से ही लगा हुआ है।पर शिकायतों की जांच और उस पर अधिकारियों की कार्यवाही में शिथिलता के चलते इससे सम्बंधित लोगों की मनमानी बे रोक टोक चल रही है।
इसी कड़ी में अब बेसहुपुर के ग्राम सभा पंडित पुरवा में कई अपात्र व्यक्तियों को जिनका पक्का मकान बना है,चौपहिया दुपहिया वाहन है,लम्बी खेती पाती है ऐसे दर्जनों लोगों को प्रधान मंत्री आवास दे दी गई है।जिसकी पहली क़िस्त भी जारी की जा चुकी है !वहीं गाँव के ही कई ऐसे परिवार भी हैं जो पात्र होते हुये भी अपने मिट्टी के कच्चे मकान में रहने को रहने को मजबूर है।गाँव के ग्रामीणों जमीरुल निशा पत्नी नूर मोहम्मद, सुनीता देवी पत्नी रज्जन, रकीबुन निशा पत्नी हाकिम अली, देवी प्रसाद पुत्र तुला राम के
 मुताबिक,जिम्मेदारों को आवास के बदले बीस हजार रूपये की मांग पूरी ना कर पाने की वजह से पात्र होते हुए भी उन्हें  प्रधान मंत्री आवास योजना की सूची से हटा दिया गया! उन्होंने बताया कि,उन सभी ने समाधान दिवस में शिकायती पत्र दे कर ग्राम प्रधान, सिक्रेटरी, तथा रोजगार सेवक के द्वारा आवास के बदले बीस हजार की मांग उन्हें  न दे पाने की कारण उनका आवास की सूची से नाम काट दिया गया। जबकि वह सभी लोग पात्र हैं व कच्चे मिटटी के मकान में गुजर बसर करने को मजबूर हैं, शिकायती पत्र में जांच कर दोषियों पर कार्यवाही करने के साथ आवास योजना का लाभ दिलाये जाने की मांग के साथ उन्होंने 15 दिनों के भीतर  अपेक्षित कार्यवाही न होने पर  वे अपने-अपने परिवार के साथ ब्लॉक मुख्यालय पर धरने बैठने की चेतवानी दी है।
"प्रधान मंत्री आवास योजना तो वैसे बेघर गरीबों के लिये चलाई गई थी,पर भ्रष्टाचार के चलते अपात्र इसका लाभ ले रहे हैं। वहीं पात्रों को इसका लाभ न मिलने से जहाँ उनमें सरकार द्वारा चलाई गयी इस योजना से निराशा फैली हुई है तो दूसरी तरफ अब उन्होंने अपने घर का सपना ही छोड़ दिया है तथा वे मायूसी से टूटे-फूटे झोपड़ों में जिंदगी गुजारने पर मजबूर हैं"

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