निगम विरोधी नीतियों के विरुद्ध संघर्ष मोर्चा का धरना

सात सूत्रीय मांगों से संबंधित  मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन मण्डलायुक्त को सौंपा
रिपोर्ट:- मनोज मौर्य 
गोण्डा। सरकार द्वारा निगम विरोधी नीतियों व परिवहन निगम के अपरोक्ष निजीकरण के विरोध में बुधवार को परिवहन निगम मुख्यालय के निर्देश पर कर्मचारी-अधिकारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने रोडवेज बस स्टेशन परिसर में प्रदर्शन कर धरना दिया। 
इस दौरान सरकार के विरुद्ध नारेबाजी के साथ शासन के निगम विरोधी नीतियों व अपनी सात सूत्रीय मांगों के बारे में जानकारी दी गई।
इसी के साथ अपनी सात सूत्रीय मांगों के साथ मुख्यमंत्री  को संबोधित ज्ञापन मण्डलायुक्त कौ सौंपा। कर्मचारी-अधिकारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने अपनी माँगों में पहली यह कि, निजी वाहन स्वामियों के लिये शुरू की गईं सभी निर्णय व योजनायें निरस्त करने के साथ,रोडवेज के मार्ग पर चल रही अवैध डग्गामार वाहनों का संचालन बंद कराने तथा 1988  के उपलब्ध प्राविधान 103 -1(A) के अनुसार निकट राज्यों का संचालन राज्य की सीमा के निकट उपलब्ध परिवहन निगम की डिपो इकाईयों तक अनुबंध योजना चलायें। इसी के साथ नये बन रहे एक्सप्रेस वे व हाइवे को राष्ट्रीयकृत मार्ग घोषित करने के साथ कोविड -19 के तहत विभाग को राहत पैकेज दिये जाने की मांग की।
दूसरे में उन्होंने संविदा चालकों को नियमित नियुक्ति के साथ शेष क  चरणबद्ध नियमीकरण की योजना बना विनियमित करें तथा उत्कृष्ट संविदा चालकों को एक वित्तीय वर्ष में  3 माह के लक्ष्य को पूरा न कर पाने की दशा में इन श्रेणियों से बाहर किये जाने को कोविड-19 के दृष्टिगत शिथिल रखे जायें। तीसरी में सीधी भर्ती में निलिट के कर्मियों को नियमित नियुक्ति में वरीयता के साथ आउटसोर्स कर्मियों को ठेकेदारों के चंगुल से मुक्त करने व न्युनतम निर्धारित  मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करायें। चौथी में मंहगाई भत्ते के साथ सेवानिवृत्त व मृत कर्मियों के बकाये का समय से भुगतान करायें। पांचवीं में मृतक आश्रितों के नियमित नियुक्ति दें।छठी व सातवीं मांग में निगम के कर्मियों की सेवा निवृत्ति के 4 वर्ष उपरान्त शासन द्वारा अस्वीकृत प्रस्ताव को पुन: अधिरोपित करने की मांग के साथ,निजीकरण के बजाय पूर्व की भांति रोडवेज घोषित करने की मांगें शामिल रहीं।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ