रिपोर्ट:मनोज मौर्य
गोण्डा।कानून व्यवस्था चुस्त - दुरूस्त बनाये रखने के लिये 107/16 की कार्रवाई पुलिस के लिये अपना सिर बचाने में जरूर सहुलियत होती होगी,पर यह धारा आम शरीफ लोगों के लिये गले की फांस बनने का काम कर रही है।
बताते चलें कि,अभी हाल ही में एडीजी के फरमान के मुताबिक बीट सिपाहियों पर यह जिम्मेदारी डाल दी गयी है कि,वह अपने इलाकों के बवाली, झगड़ालू गुण्डों व ऐसे लोग हों जिनका अतीत या वर्तमान में अपराधिक इतिहास रहा हो उन्हें चिन्हित कर उनको पाबंद करायें।लेकिन बीट के ये सिपाही कितनी इमानदारी से इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं।क्यों कि,राजनैतिक व अन्य तरह के प्रभाव में काम कर रहे ये बीट सिपाही आम शरीफ लोगों को 107/116 का शिकार बनाने में लगे हैं तथा उन्हें इस बावत नोटिस थमा रहे हैं।जिसमें, समाज सेवी,डाक्टर, पत्रकार, व व्यवसायी भी शामिल हैं।
जिसका हाल ही में एक उदाहरण वजीरगंज से सामने आया है ।जहाँ एक क्लीनिक चला रहे चिकित्सक को इसकी नोटिस थमाई गयी।नोटिस मिलते ही वह हत्प्रभ हो गये उन्होंने जब इस संबंध में संबंधित सिपाही व थानेदार से बात की तो उन्होंने कहा गल्ती से हो गया होगा सही हो जायेगा।चिकित्सक के मुताबिक यह कोई गल्ती नहीं है बल्कि विरोधियों द्वारा पुलिस को खुश कर उन्हें परेशान करने हेतु यह कार्रवाई करवाई गयी है।हालांकि उन्होंने इस बावत अपनी आपत्ति एसडीएम से दर्ज करा दी है,पर ऐसे सैकड़ों लोगों का क्या होगा जो अपने विरोधियों व पुलिस की मिलीभगत से साजिश का शिकार होकर 107/116 की कार्रवाई झेलने को मजबूर हैं।वहीं कई बार थानाक्षेत्र की अपराधिक घटनाओं को उजागर करने के चलते पुलिस द्वारा रंजिशन पत्रकारों के ऊपर ऐसी कार्रवाई कर दी जाती है।
सूत्रों के मुताबिक पुलिस महकमें द्वारा कानून व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए बनाई गई धारा 107/16 चुनाव के समय में पुलिस द्वारा लक्ष्य पूरा करने के लिए धड़ल्ले से इसका गलत इस्तेमाल करती है। आचार संहिता लागू होने से पहले व बाद में सैकड़ों लोगों को पुलिस शांति भंग की आशंका की इस धारा में पाबंद कर देती है। ऐसे में लोग इसका शिकार हो जहाँ जमानत के लिए उपजिलाधिकारी न्यायालय का चक्कर लगाने पर मजबूर होते हैं,वहीं पुलिस आंकड़ों में अधिक से अधिक सफलता को दिखा अपने उच्चाधिकारियों व महकमें की वाहवाही लूटती है।
हालांकि उच्चाधिकारियों को इस बावत पारदर्शिता रखनी चाहिये कि तथा मानिटरिंग के लिये किसी जिम्मेदार अधिकारी को लगाना चाहिये जो सिर्फ उन्हें ही इसमें पाबंद करे जो अपराधिक प्रवृत्ति के हों या जो दंगे फसाद में आगे रहते रहे हों। इससे इस कार्रवाई की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी व महत्व बढ़ने के साथ समाज भी लाभान्वित होगा।


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