मनोज मौर्य
गोंडा।जिले के कौड़िया थाना क्षेत्र के अंतर्गत पठान पुरवा बंगाली द्वारा संचालित किये जा रहे सपेरा क्लीनिक में इलाज कराने आई क्षेत्र की एक मरीज के इलाज के बाद और ज्यादा बीमार हो जाने पर बंगाली डाक्टर द्वारा उसे भगा दिया गया। जिसकी शिकायत उसके द्वारा पुलिस से की गई है।
थानाक्षेत्र के पठान पुरवा निवासी बशीर खान पुत्र निरहू द्वारा पुलिस को दिये अपने तहरीर में बताया कि,उसकी पुत्री नगमा की तबियत खराब होने के चलते उसे पठान पुरवा चौराहे पर स्थित एक बंगाली डाक्टर को दिखाया।जिस पर डाक्टर द्वारा गलत इंजेक्शन दे दिया गया।जिस पर उसकी हालत और बिगड़ गई।इस पर जब दोबारा बंगाली के पास पुत्री को लेकर गया तो उसने हमें वहाँ से भगा दिया।
बताते चलें कि,विभागीय मिलीभगत के चलते पठान पुरवा चौराहे के साथ पूरे जनपद में सपेरा क्लीनिक व झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार है।स्थानीय लोगों द्वारा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कई बार प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग करने के बावजूद स्थानीय स्तर पर सीएचसी अधीक्षकों की मिली भगत के चलते इनके विरुद्ध यदि जिले के स्वास्थ्य अधिकारी रिपोर्ट मांगते हैं तो उनके द्वारा गलत रिपोर्ट वहाँ भेज दी जाती है।जिसके चलते इन अवैध क्लीनिक चलाने वाले डाक्टरों पर कार्यवाही नहीं हो पाती ,जिसका खामियाजा आम लोगों को उठाना पड़ता है।
बताते चलें कि,नगमा का नया मामला नहीं है।इससे पूर्व में डॉक्टर बंगाली के इलाज से ठडक्कीपुर के रहने वाले अब्बास अली की 15 वर्षीय लड़की की मृत्यु हो गई थी। तब लोगों के शिकायत पर सीएचसी अधीक्षक डॉक्टर जेपी शुक्ला के द्वारा उसके विरुद्ध अभियोग पंजीकृत कराने के लिए एक लेटर जारी हुआ था लेकिन,बावजूद इसके कौड़िया थाने पर अभियोग पंजीकृत नहीं किया गया।जो विभागीय व पुलिस दोनो की मिलीभगत की ओर गंभीर इशारे कर रही है।
वहीं सूत्रों के मुताबिक अब तक बंगाली के इलाज से क्षेत्र में कई घटनाएं घट चुकी हैं। लेकिन इस बावत स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता समझ से परे है।
क्या कहते हैं सीएमओ?
इस बावत जब मुख्य चिकित्सा अधीक्षक से दूरभाष पर संपर्क किया गया तो, उन्होंने बताया कि ऐसी जानकारी उन्हें नहीं है।यदि ऐसा कोई फर्जी डॉक्टर है तो जिसके ऊपर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।


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