गोण्डा। वैसे तो जिले में विद्युत संविदाकर्मियों का अपने अधिकारियों पर हावी रहना कोई नई बात नहीं है ,पर हद तो तब हो गई जब मुख्यालय पर तैनात एक आकुशल विद्युत संविदाकर्मी की शिकायत पर एस.ई. विद्युत ने उसका स्थानांतरण दूसरे क्षेत्र में कर दिया।इस पर मानो मुख्यालय पर जैसे बिजली गिर पड़ी हो। अधिकारी वर्ग हो या फिर मीडिया हर ओर यही सवाल कि,आखिर उसका स्थानांतरण कैसे हुआ, कैसे कर दिया?और फिर विभाग हो या गैर विभागीय अधिकारी, उनके फोन की घंटी आकुशल विद्युत संविदा कर्मी स्थानांतरण करने वाले अधिकारी के कार्यालय में घनघनाने लगा।और तो और कुछ मीडिया वाले भी तत्कालीन प्रभारी अधिकारी से सवाल करने में चूकते नजर नहीं आए।
मामला जिला मुख्यालय के झंझरी बिजली घर में तैनात रहे आकुशल विद्युत संविदाकर्मी विनय कुमार मिश्र का है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक विनय अपने केंद्र में भ्रष्टाचार समेत बिजली चोरी की शिकायत पर उस समय के प्रभारी अधिशाषी अभियंता ने बीते 25 जुलाई को उसका स्थानांतरण जनपद के मनकापुर बिजली केंद्र पर कर दिया था। विद्युत संविदाकर्मी के इस अप्रत्याशित स्थानांतरण से पूरे जिले में मानो भूचाल आ गया हो। कई विभागों के जिम्मेदारों के फोन अधिकारी के मोबाइल पर घनघनाते रहे।विभागीय सूत्रों की माने तो कुछ मीडिया के लोगों ने भी उसके स्थानांतरण पर
बकायदा अधि.अधिकारी से यह पूछने में गुरेज नहीं किया कि,किस नियम से आकुशल विद्युत संविदाकर्मी का स्थानांतरण कर दिया गया ?
बहरहाल विभागीय अधिकारी से अब यह सवाल करना बड़ा हास्यास्पद है कि,उसने अपने चतुर्थ श्रेणी के संविदाकर्मी को स्थानांतरित कैसे किया?भई उसपर विभाग की जिम्मेदारियां हैं ,कौन कहां कैसे अच्छा कार्य कर सकता है ,उससे बेहतर कौन समझ सकता है,हां चहेतों को यह जरूर हजम नहीं हो रहा कि,अपने अधिकारियों पर हावी रहने वाले अदने से कर्मचारी का स्थानांतरण अधिकारियों ने ही कर दिया।
बहरहाल कल तक अपने अधिकारियों के साथ बैठकर चाय की चुस्कियां ले रहे आकुशल विद्युत संविदाकर्मी अब बड़ी ही इमानदारी से मनकापुर में अपनी जिम्मेदारी निभाते हुये देखा जा सकता है। इसी तरह शायद और कईयों के स्थानांतरण की जरुरत है जिससे ऐसे दबंग व रसूख वाले संविदाकर्मी अपने क्षेत्र से इतर गैर क्षेत्रों में जायें।जिससे विभाग के साथ-साथ आम लोगों का भला हो सके।


1 टिप्पणियाँ
बड़ा ही अच्छा लेख लिखा गया है।
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