वायरल वीडियो पर जागा प्रशासन, राजस्व, पुलिस और खान विभाग की संयुक्त कार्रवाई में डंफर व एक पोकलैंड मशीन समेत तीन बरामद
गोंडा। जिले के नवाबगंज में बन रही रिंग रोड अब अवैध खनन का बड़ा जरिया बनती जा रही है। थानाक्षेत्र के ढेमवा घाट चौकी क्षेत्र में मिट्टी और बालू की आड़ लेकर खनन माफिया दिन-रात नदी और आसपास की जमीन को खोखला करने में जुटे हुये हैं,जिन्हें मूक रूप से खान विभाग का शह प्राप्त होने के कारण प्रशासनिक तंत्र मूकदर्शक बना हुआ है।
बता दें कि, ढेमवा घाट चौकीक्षेत्र अंतर्गत ढेमवा घाट, गोकुला, दत्तनगर, साखीपुर सहित आसपास के गांवों में रिंग रोड निर्माण के नाम पर बड़े पैमाने पर अवैध खनन चल रहा है।जहाँ खनन माफिया नियमों को ताक पर रखकर पोकलैंड और जेसीबी मशीनों से मिट्टी और बालू की जमकर खुदाई कर रहे हैं। इस खनन में आवश्यक खनन पट्टा, पर्यावरणीय स्वीकृति, परिवहन पास और रॉयल्टी भुगतान जैसी अनिवार्य प्रक्रियाओं का कहीं कोई पालन नहीं हो रहा है।
अवैध खनन का यह खेल सीधे तौर पर खनिज एवं खनन (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 तथा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 का खुला उल्लंघन है। इसके बावजूद खनन माफिया बेखौफ होकर नदी के किनारों और तलहटी तक मशीनें उतार चुके हैं।
बीते वर्ष 18 नवंबर को इस अवैध कारोबार पर आंशिक रूप से तब रोक लगी थी, जब जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला खनन अधिकारी डॉ. अभय रंजन और पुलिस की संयुक्त टीम ने गोकुला गांव में छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान अवैध खनन में प्रयुक्त एक पोकलैंड मशीन और सात डंपर सीज किए गए थे। जांच में रिंग रोड का कार्य देख रहे सुनील तिवारी का नाम भी सामने आया था, जिनके निर्देशन में खनन किए जाने की बात उजागर हुई थी। हालांकि, सख्त और निरंतर कार्रवाई न होने से कुछ ही समय बाद खनन माफिया फिर सक्रिय हो गए।
वर्तमान में हालात और भी गंभीर हो चुके हैं। खनन माफिया नदी की तलहटी को तब तक खोद रहे हैं, जब तक नीचे से पानी न निकल आए। क्षेत्र बाढ़ग्रस्त होने के कारण खुदाई के गड्ढे पानी से भर जाते हैं, जिससे अवैध खनन के निशान स्वतः ही मिट जाते हैं। यह तरीका कानून से बचने की साजिश के साथ-साथ भविष्य में बाढ़, भू-धंसाव और गांवों के डूबने का खतरा भी बढ़ा रहा है।
रात-दिन चल रहे इस काले कारोबार की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इन वायरल दृश्यों में भारी मशीनें, डंपरों की कतारें और नदी की तलहटी को खोदते साफ दृश्य दिखाई दे रहे हैं। इसके बावजूद अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी द्वारा ठोस कार्रवाई न किया जाना कई सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब आम नागरिक खुद अवैध खनन के सबूत सार्वजनिक कर रहे हैं, तब प्रशासन और स्थानीय पुलिस की खामोशी संदेह पैदा करती है। लोगों का आरोप है कि बिना स्थानीय स्तर के संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन संभव नहीं हो सकता।
हालांकि वायरल फोटो और वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है।
इस संबंध में जब जिला खनन अधिकारी डॉ. अभय रंजन से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि अवैध खनन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस बाबत थाना नवाबगंज को सूचित कर दिया गया है और लिखित पत्र भी भेजा गया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन की यह कार्रवाई वास्तव में जमीन पर नजर आती है या फिर रिंग रोड की आड़ में चल रहा सफेद रेत का काला कारोबार यूँ ही फलता-फूलता रहेगा।
वायरल वीडियो पर टूटी नींद,की कार्रवाई
गोंडा। रिंग रोड की आड़ में खनन माफिया द्वारा किये जा रहे खनन की वीडियो वायरल होने के बाद आखिरकार जिला प्रशासन की नींद टूट ही गई और बुधवार को डीएम के निर्देश पर नवाबगंज थाना क्षेत्र में बुधवार को राजस्व, खनन और पुलिस की संयुक्त टीमों की कार्रवाई दुर्गागंज, जैतपुर, माझा राठ व ढेमवा घाट में की गई। जिसमें दुर्गागंज माझा से एसआईएल (SIL) कंपनी के तीन बालू लदे डंफर और एक पोकलैंड मशीन जब्त की गई। इस दौरान छापेमारी की सूचना पहले ही लीक होने के चलते
लेकिन छापेमारी की सूचना पहले ही लीक हो जाने से ओएसएस (OSS) कंपनी के तथाकथित जिम्मेदार सुनील तिवारी अपने दर्जनों डंफर और मशीनें लेकर मौके से फरार होने में कामयाब रहे । इससे प्रशासनिक सूचना तंत्र और राजस्व विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बहरहाल एसडीएम तरबगंज विश्वामित्र सिंह ने बताया कि निरीक्षण में बड़े पैमाने पर अवैध मिट्टी व बालू खनन की पुष्टि हुई है। रिंग रोड के लिए मिली अनुमति के विपरीत अन्य स्थानों पर मानक से कहीं अधिक खनन किया गया है, जिसकी जांच की जा रही है।


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